भारत की कृषि व्यवस्था को आधुनिक, आत्मनिर्भर और लाभकारी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ‘प्रगति मिशन’ के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को कृषि-उद्यमी (Agri-Entrepreneur) के रूप में तैयार किया जाएगा, ताकि वे किसानों तक आधुनिक तकनीक, सरकारी योजनाओं, वित्तीय सेवाओं और बेहतर बाजार की पहुंच सुनिश्चित कर सकें।
इस पहल का उद्देश्य केवल खेती को बेहतर बनाना ही नहीं, बल्कि गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा करना और किसानों की आय बढ़ाना भी है।
प्रगति मिशन क्या है?
प्रगति मिशन केंद्र सरकार की एक नई पहल है, जिसके अंतर्गत देशभर में हजारों ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित कर कृषि-उद्यमी बनाया जाएगा। ये कृषि-उद्यमी अपने-अपने क्षेत्रों के किसानों को आधुनिक खेती और कृषि सेवाओं से जोड़ने का कार्य करेंगे।
इस मिशन का लक्ष्य ग्रामीण स्तर पर ऐसा मजबूत नेटवर्क तैयार करना है, जिससे किसानों को अधिकांश कृषि सेवाएं अपने गांव या आसपास ही उपलब्ध हो सकें।
मिशन की मुख्य विशेषताएं
✅ 20,000 नए कृषि-उद्यमी तैयार किए जाएंगे।
✅ लगभग 20 लाख छोटे एवं सीमांत किसानों को लाभ मिलेगा।
✅ पहले चरण में 8 राज्यों में शुरुआत होगी।
✅ ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
✅ आधुनिक खेती और नई तकनीकों का विस्तार होगा।
पहले चरण में किन राज्यों में लागू होगा?
प्रगति मिशन की शुरुआत निम्न राज्यों से की जाएगी—
- उत्तर प्रदेश
- मध्य प्रदेश
- बिहार
- झारखंड
- महाराष्ट्र
- राजस्थान
- पश्चिम बंगाल
- असम
भविष्य में इसे अन्य राज्यों तक भी विस्तारित किया जा सकता है।
किसानों को क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी?
प्रशिक्षित कृषि-उद्यमी किसानों की कई महत्वपूर्ण कार्यों में सहायता करेंगे, जैसे—
- मिट्टी की जांच (Soil Testing)
- आधुनिक कृषि मशीनों की जानकारी
- ड्रोन तकनीक का उपयोग
- वैज्ञानिक खेती की सलाह
- सरकारी योजनाओं की जानकारी
- बैंक ऋण एवं वित्तीय सहायता
- बेहतर बाजार तक पहुंच
- फसल प्रबंधन एवं उत्पादन बढ़ाने के उपाय
किसानों को क्या लाभ होगा?
इस मिशन से किसानों को कई प्रकार के लाभ मिलने की संभावना है—
- खेती की लागत कम होगी।
- आधुनिक तकनीक अपनाने में आसानी होगी।
- उत्पादन क्षमता बढ़ेगी।
- बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी।
- सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिलेगा।
- किसानों की आय बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
सरकार के प्रमुख लक्ष्य
सरकार ने इस मिशन के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित किए हैं—
- किसानों की आय में कम से कम 30% तक वृद्धि का प्रयास।
- धान, मक्का एवं आलू जैसी प्रमुख फसलों की उत्पादकता में 15–20% तक सुधार।
- अधिक किसानों को पुनर्योजी (Regenerative) खेती से जोड़ना।
- ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित रोजगार को बढ़ावा देना।
- महिला कृषि-उद्यमियों एवं कृषि सखियों की भागीदारी बढ़ाना।
किन संस्थाओं का मिलेगा सहयोग?
इस मिशन के सफल संचालन में कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, वित्तीय समावेशन और बाजार से जुड़ाव के क्षेत्र में सहयोग करेंगी।
इन साझेदारियों का उद्देश्य किसानों और ग्रामीण युवाओं तक आधुनिक कृषि सेवाओं को प्रभावी ढंग से पहुंचाना है।
ग्रामीण युवाओं के लिए सुनहरा अवसर
यदि आप ग्रामीण क्षेत्र से हैं और कृषि क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं, तो प्रगति मिशन आपके लिए एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद कृषि-उद्यमी के रूप में आप किसानों की मदद करने के साथ-साथ स्वयं भी आय का नया स्रोत विकसित कर सकते हैं।
Yojanasthal की राय
प्रगति मिशन केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि गांवों में कृषि और रोजगार दोनों को नई दिशा देने वाली पहल है। यदि इसका प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो लाखों किसानों को आधुनिक खेती का लाभ मिलेगा और हजारों युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे।
निष्कर्ष
भारत की कृषि को भविष्य के लिए तैयार करने में प्रगति मिशन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित कृषि-उद्यमियों और सरकारी सहयोग के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने, खेती को लाभकारी बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में यह पहल एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।
FAQ
Q1. प्रगति मिशन क्या है?
प्रगति मिशन केंद्र सरकार की पहल है, जिसके तहत ग्रामीण युवाओं को कृषि-उद्यमी बनाकर किसानों तक आधुनिक कृषि सेवाएं पहुंचाई जाएंगी।
Q2. कितने किसानों को लाभ मिलेगा?
लगभग 20 लाख छोटे एवं सीमांत किसानों को इस मिशन से लाभ मिलने का लक्ष्य है।
Q3. कितने कृषि-उद्यमी तैयार किए जाएंगे?
पहले चरण में 20,000 कृषि-उद्यमी तैयार किए जाएंगे।
Q4. किन राज्यों में शुरुआत होगी?
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और असम।





💬 Yojanasthal चर्चा